Translations:Original sin/39/hi
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इसलिए, आज पृथ्वी पर जिस प्रकार यौन संबंध (sex) का अभ्यास किया जाता है, वह मूल पाप (Original Sin) का कारण नहीं बल्कि उसका परिणाम (effect) है।
सेक्स स्वयं में पाप नहीं है।
लेकिन मनुष्यों ने यौन क्षेत्र में “पवित्र अग्नि” (sacred fire) के दुरुपयोग को अदन (Garden of Eden) की कृपा से गिरने के बाद सबसे बड़ा पाप बना दिया है।
यह उन्होंने अपनी इच्छा से परमेश्वर-चेतना के सभी पवित्र केंद्रों (sacred centers) — अर्थात् चक्रों (chakras) — में उस पवित्र अग्नि का अपमान करके किया है, जब वे शरीर की वासनाओं (lusts of the flesh) को पूरा करने लगे और दस आज्ञाओं (Ten Commandments) की अवहेलना करने लगे।